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Showing posts from 2016

तरूण सागर जी महाराज के कहे कुछ पंक्तियों के अँश

तरूण सागर जी महाराज के कहे कुछ पंक्तियों के अँश : सफलता के 20  मँत्र " 👏 👏1.खुद की कमाई  से कम           खर्च हो ऐसी जिन्दगी           बनाओ..! 👏2. दिन  मेँ कम  से कम            3 लोगो की प्रशंसा करो..! 👏3. खुद की भुल स्वीकारने            मेँ कभी भी संकोच मत            करो..! 👏4. किसी  के सपनो पर  हँसो            मत..! 👏5. आपके पीछे खडे व्यक्ति            को भी कभी कभी आगे            जाने का मौका दो..! 👏6. रोज हो सके तो सुरज को            उगता हुए देखे..! 👏7. खुब जरुरी हो तभी कोई           चीज उधार लो..! 👏8. किसी के पास  से  कुछ            जानना हो तो विवेक  से            द...

तरूण सागर जी महाराज के कहे कुछ पंक्तियों के अँश

तरूण सागर जी महाराज के कहे कुछ पंक्तियों के अँश : सफलता के 20  मँत्र " 👏 👏1.खुद की कमाई  से कम           खर्च हो ऐसी जिन्दगी           बनाओ..! 👏2. दिन  मेँ कम  से कम            3 लोगो की प्रशंसा करो..! 👏3. खुद की भुल स्वीकारने            मेँ कभी भी संकोच मत            करो..! 👏4. किसी  के सपनो पर  हँसो            मत..! 👏5. आपके पीछे खडे व्यक्ति            को भी कभी कभी आगे            जाने का मौका दो..! 👏6. रोज हो सके तो सुरज को            उगता हुए देखे..! 👏7. खुब जरुरी हो तभी कोई           चीज उधार लो..! 👏8. किसी के पास  से  कुछ            जानना हो तो विवेक  से            द...

सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग

लाखों लोगों के सपने निगल गया !!! ”सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग”! HINDI MOTIVATIONAL BLOG ************************* दोस्तों, फ़िल्म तमाशा देखकर वाकई समझ् में आया हर इंसान के दो रूप होते हैं एक उसका असली रूप जिसको वह अकेला जानता हैं और दूसरा रूप जो वह दुनिया को दिखाने के लिये जीता हैं । पहला रूप बचपन से उत्पन्न होता हैं मतलब पागलपन , किसी की भी परवाह नहीं , कुछ भी कर गुजरने की जिद , नया सीखने का साहस , अदभुत उमंग और जुनून । लेकिन जैसे जैसे बडा हुआ लोगों ने उस बचपन को कुचलना शुरू किया और धीरे- धीरे लोगों ने मेरे ऊपर अपनी सोच को थोपना शुरू किया । और कुछ समय बाद मेरे दूसरे रूप का उदय हुआ जो दूसरे लोगों या दुनिया की सोच के मुताविक हैं और मेरा पहला रूप बचपन वाला कही छुप गया । अब मुझे भी ज़माने ने अपनी दौड़ में शामिल कर लिया । जिसमें मुझे केवल Doctor या Engineer बनना था, अपने आप को भूलकर क्योंकि अब मुझे एक भयानक रोग लग चुका था। क्या कहेंगे लोग् ? हां एक भयानक रोग क्या कहेंगे लोग । मतलब अब मैं कुछ भी करने से पहले क्या कहेंगे लोग सोचने लगा और कई बार तो लोग क्या सोचेंगे...

गोंड जनजाति

गोंड (जनजाति),भारत की एक प्रमुख जनजाति 13 राज्य में फैली है गोंड (जनजाति) - 14 करोड़ (मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़, तेलंगाना , आंध्र प्रदेश,उड़ीसा , कर्नाटक ,उत्तर प्रदेश ,बिहार , ,ज़ारखंड ,गुजरात, पक्षिम बंगाल , आसाम )..13 राज्य में फैला है गोंड जनजाति समुदाय . गोंड (जनजाति), भारत की एक प्रमुख जनजाति हैं। गोंड भारत के कटि प्रदेश - विंध्यपर्वत, सतपुड़ा पठार, छत्तीसगढ़ मैदान में दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम - में गोदावरी नदी तक फैले हुए पहाड़ों और जंगलों में रहनेवाली आस्ट्रोलायड नस्ल तथा द्रविड़ परिवार की एक जनजाति, जो संभवत: पाँचवीं-छठी शताब्दी में दक्षिण से गोदावरी के तट को पकड़कर मध्य भारत के पहाड़ों और जंगलों में फैल गई। आज भी मोदियाल गोंड जैसे समूह हैं जो जंगलों में प्राय: नंगे घूमते और अपनी जीविका के लिये शिकार तथा वन्य फल मूल पर निर्भर हैं। गोंडों की जातीय भाषा गोंडी है जो द्रविड़ परिवार की है और तेलुगु, कन्नड़, तमिल आदि से संबन्धित है। परिचय-बूड़ादेव, दुल्लादेव, घनश्यामदेव, बूड़ापेन (सूर्य) और भीवासू गोंडों के मुख्य देवता हैं। इनके अतिरिक्त फसल, शिकार, ...

अनमोल वचन

भगवान के आगे दीपक जलाने का फल तब ज्यादा होता है, जब हम किसी का दिल न जलाये। जय बड़ादेव

सूचना

जय सेवा जय बड़ादेव आप सभी सगाजनों को सूचित किया जाता है कि गोंडवाना महासभा युवा प्रकोष्ठ इकाई मध्यप्रदेश के तत्वावधान मे दिनांक 05 जून 2016 दिन रविवार को रायसेन मे बैठक रखी गयी है,जिसमे आप सभी युवा भाई बहन सादर आमंत्रित है। अभी स्थान तय नहीं किया जैसे ही स्थान तय हो जायेगा आपको सूचना कर दी जायेगी ।

जय सेवा का मतलब

जय सेवा ==============================यह बडादेव का मूल मंत्र है एक संदेश है उन निष्ठावान लोगो के लिए जो प्रकृती शक्तिबडादेव की सत्ता पर विश्वास करते हैं और आपस मे मिलकर रहते हैं.. (2)जो एक दूसरे से प्रेम करते हैं व दूसरे सगा जनो के हित मे खुशी और दुख मे उन्हे सहयोग व सहायता प्रदान करते हैं ! (3)जो अपने आपको अपने सगा समुदाय से तुलना नहीं करते और सगा समाज के प्रति ईर्ष्या ,द्वेष,सगाजनो की निंदा,चूगलखोरी,जुआ ,व नशाखोरी का त्याग करते हैं..वे अपनी मूलप्रकृती की तरफ़ से सीधे रास्ते पर हैं और उन पर ही बडादेव की कृपाद्रश्टी है..!! (4)यह मूलप्रक्रति का वह मंत्र है जो बडादेव की सत्ता को दर्शाता है और मार्गदर्शन है उन निष्ठावान लोगो के लिए जो बडादेव(मूलप्रकृतीशक्ति)के द्वारा बनाए गए नियम पर चलते हैं हरे भरे ब्रक्षो की रक्षा करते हैं जलस्त्रोतो झरने अथवा नदी के जल को पवित्र रखते हैं और धन्यवाद देते हैं आभार व्यक्त करते हैं अपने उस परमपिता एवं मात्रशक्ति का जो इस चराचर धरती को नव ग्रहशक्ति को व ब्रम्हांड को रचने बाला है .!!!!!! (5)ए प्रकृति की संतानो आभार व्यक्त कर सेवा...

मोतीकण

मोतीकण ....................... पुज्यनिय आचार्य गोंडीयन धर्मगुरु मोतीरावणजी कंगाली सर की याद मे .............. प्रिय नवयुवक गोंडीयन सगाजनों आप सभी को ति. अवचितराव सयाम का सप्रेम जय सेवा जय गोंडवाना . आइए . ================== फडापेन सुमिरन मंत्र को हिंदी में को समझने का प्रयास करते है . ================== उन सभी हमारे अपने कोया धर्म मुठवाओं ने अनंत सृष्टी और चराचर जगत में  पालन ओर संहार करने वाली  अनादि शक्तियों की जानकारी ,सुयमोद सत्य के माध्यम से कोयापुत्रों को सत्य ज्ञान शिक्षा से  प्रदान कि है .  ताकि भुताल के अण्डज, पिण्डज ,स्वदेज और उदभित के कल्याण साध्य संभव हो सके . उन्ही मुठवाओं की शिक्षा से मानव प्राणी जीवन को सुखमय और शांतीमय बना सका है . आदिम तैंतीस कोट मुठवाओं ने ,आदि गुरु पहांदी पारी कुपार लिंगो की आज्ञानुसार, पृथ्वी के तैंतीस मुल तत्वों को,  सुयमोद अर्थात सत्य ज्ञान के माध्यम से जाना और कोयापुत्रों को उपदेश दिया.  की सृष्टी और चराचर जगत के सृजन और पालनहार एंव संहार तथा संरक्षण के पंच भुत प्रचण्ड शक्तियों की कृपा है . जिनकी...

पाँचवीं अनुसूची

पांचवीं अनुसूची पांचवीं अनुसूची [अनुच्छेद 244(1)] अनुसूची क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासनऔर नियंत्रण के बारे में उपबंध साधारण भाग क 1. निर्वाचन- इस अनुसूची में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, "राज्य" पद के अंतर्गत 1 *** 2[असम3 [4[मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम]] राज्य] नहीं हैं | 2. अनुसूची क्षेत्रों में किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति- इस अनुसूची के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार उसके अनुसूचित क्षेत्रों पर है | 3. अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को राज्यपाल 5*** द्वारा प्रतिवेदन- ऐसे प्रत्येक राज्य का राज्यपाल5***, जिसमें अनुसूचित क्षेत्र हैं, प्रतिवर्ष या जब भी राष्ट्रपति इस प्रकार अपेक्षा करे, उस राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देगा और संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार राज्य को उक्त क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में निदेश देने तक होगी | भाग ख अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन और नियंत्रण 4. जनजातीय सल...

करमा नृत्य रिकार्ड

मप्र का आदिवासी कर्मा नृत्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज THURSDAY, MAY 26, 2016 ; भोपाल । आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले की समृद्ध लोक संस्कृति एवं लोक कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिये जिला प्रशासन द्वारा 2 दिवसीय आदि उत्सव का आयोजन 10-11 अप्रैल को किया गया था। इसी कड़ी में महात्मा गांधी स्टेडियम में आदिवासियों का लोक नृत्य कर्मा की शानदार सामूहिक प्रस्तुति के जरिये गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की कोशिश की गयी थी। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त संतोष शुक्ला ने गुरुवार को बताया कि कर्मा नृत्य की प्रस्तुति को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अब अधिकृत रूप से दर्ज कर लिया गया है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकारियों ने अधिकृत रूप से इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी है जिसमें यह कहा गया है कि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए कर्मा नृत्य के दावे को स्वीकार कर लिया गया है। कर्म देवता को समर्पित है कर्मा नृत्य कर्मा नृत्य गोंड जनजाति का प्रमुख लोक नृत्य है। यह नृत्य कर्म देवता को समर्पित है। कर्मा नृत्य पद सं...

मोतीकण

मोतीकण .......... पुज्यनिय आचार्य गोंडीयन धर्मगुरु मोतीरावणजी कंगाली सर की याद में ........... प्रिय नवयुवक गोंडीयन सगाजनों आप सभी को ति. अवचितराव सयाम का सप्रेम जय सेवा . आइए ================== " कोळा सोपे कियाना "       (गोद सोपना ) इस मह्त्वपूर्ण गोंडीयन विवाह रश्म को समझने का प्रयास करते है . ================== गोंडीयन विवाह के "चिखला मांदी "कार्यक्रम के पश्चात, दुलहन के माता पिता दुलहा के माता पिता को मंडप के निचे सतरंजी पर बैठाते है ,और उनको चावल के अक्षितों का टिका लगाकर नमस्कार करते है . दुलहन के पिता अपने दामाद को और माता अपनी कन्या को पकडकर दोनों को दुलहा के माता - पिता की गोद में बिठा देते है . दुलहा को उसकी पिता की गोद में और दुलहन को उसकी सास की गोद में बिठाया जाता है . उस वक्त दुलहन के माता पिता उनको , " आज से हमारी कन्या आपके कुल की ' कोळयार' बन गई " उसकी हिफाजत करना आपका कर्तव्य है . ऐसा कहते है . "कोळयार "इस शब्द का अर्थ ही "कोळा ते वाये" अर्थात "गोद में आने वाली कन्या" ऐसा हो...