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जय सेवा का मतलब

जय सेवा
==============================यह
बडादेव का मूल मंत्र है एक संदेश है उन
निष्ठावान लोगो के लिए जो प्रकृती
शक्तिबडादेव की सत्ता पर विश्वास
करते हैं और आपस मे मिलकर रहते हैं..
(2)जो एक दूसरे से प्रेम करते हैं व दूसरे सगा
जनो के हित मे खुशी और दुख मे उन्हे
सहयोग व सहायता प्रदान करते हैं !
(3)जो अपने आपको अपने सगा समुदाय से
तुलना नहीं करते और सगा समाज के प्रति
ईर्ष्या ,द्वेष,सगाजनो की
निंदा,चूगलखोरी,जुआ ,व नशाखोरी का
त्याग करते हैं..वे अपनी मूलप्रकृती की
तरफ़ से सीधे रास्ते पर हैं और उन पर ही
बडादेव की कृपाद्रश्टी है..!!
(4)यह मूलप्रक्रति का वह मंत्र है जो
बडादेव की सत्ता को दर्शाता है और
मार्गदर्शन है उन निष्ठावान लोगो के
लिए जो बडादेव(मूलप्रकृतीशक्ति)के
द्वारा बनाए गए नियम पर चलते हैं हरे भरे
ब्रक्षो की रक्षा करते हैं जलस्त्रोतो
झरने अथवा नदी के जल को पवित्र रखते हैं
और धन्यवाद देते हैं आभार व्यक्त करते हैं
अपने उस परमपिता एवं मात्रशक्ति का
जो इस चराचर धरती को नव ग्रहशक्ति
को व ब्रम्हांड को रचने बाला है .!!!!!!
(5)ए प्रकृति की संतानो आभार व्यक्त
कर सेवा जोहार करो अपने उस रचनाकार
बडादेव का जिसने तुम्हे सुंदर तन दिया
खाने को हरे भरे वन फल बनस्पति .साग व
मूल दिए जिसने तुम्हारे लिए धरती बनाई
उस पर हरी भरी ब्रक्षो की चादर
उढाई.पीने के लिए पवित्र जल दिया और
सात सतहो बाला आसमान बनाया जो
तुम्हे सूरज की आग से बचा सके और तुम्हारे
जीवन की रक्षा कर सके .! क्योंकी
बडादेव सब जानता है जिसे हम तुम नहीं
जानते उसे हर चीज का सामर्थय प्राप्त है
वह बडा ही तत्वदर्शी है .!!!
(6)जो इस मंत्र मे आस्था रखते हैं उनके
लिए उचित है की वे इस धरती पर किसी
तरह की बिगाड़ पैदा न करें हरेव्र्क्षो की
रक्षा करें नदीयाँ ,व प्राणवायु को
पवित्र रखे ऐसे हर उस व्यक्ति से दुर रहें जो
उन्हे शराब,जुआ,नशा,अस
लीलता,ईर्षया,द्वेष,अहंकार,अपशब
्दता,की और ले जाता है !!
(7)जिन्होने इन बातो को मानने से
इनकार कर दिया और समाज से
ईर्षया,द्वेष,घ्रना,अहंकार,सगाजनो को
गलत सलाह देना,सगा समाज की
निंदाऔर शराब ,जुआ,असलीलता,का
रास्ता जिन्होने अपनाया वे बडादेव के
कोप (क्रोध)के भागीदार हो गए और
सदा की तरह उन्हे अपमान,दरिद्रता,व
दुखो को भोगना पडा क्योंकी जो
प्रक्रति के आदेश की अवहेलना करते हैं
उनकी रक्षा कोई नहीं कर सकता
क्योंकी बडादेव जितना दयालु है उतना
ही दन्ड देने मे भी शक्त और कठोर है ..उसे
समस्त शक्तियों की अधिसत्ता प्राप्त
है और सभी शक्तियाँ उसके अधीन हैं..
(8)जो भी प्रकृती की सत्ता पर
विश्वास कर सेवा जोहार करते हैं
नियमित हरे व्रक्षो को जल देते हैं साजा
,महूआ,आम ,पीपल,व अन्य सभी के पौधे
रोपकर उन्हे ब्रक्ष बनाते हैं ,सदा सत्य
बोलते हैं सभी जीवो से प्रेमपूर्वक व्यवहार
करते हैं बडादेव की प्रशन्नता उन पर सदा
रहती है..क्योंकी वह बडादयावान
,तत्वदर्शी,व दुनिया का रचनाकार है जो
उसके इन आदेश को समझकर इनका अनूसरण
करते हैं वही सफलता ,धन,वैभव,यश,और
सम्मान के अधिकारी हैं .!!!
(9)जो बडादेव की सत्ता को नकारते हैं
और तर्क करते हैं की बडादेव अगर हैं तो वह
हमे स्वयं आकर रास्ता क्यों नहीं
दिखाता ???तो जानलो की ऐसे लोग
अंधे हैं बहरे हैं गूँगे हैं क्योंकी बडादेव दुश्टो
और अधार्मियो को रास्ता नहीं
दिखाता क्या इन्हे बडादेव की सत्ता
दिखाई नहीं देती जो इन्हे चारो और से
घेरे हुए है और प्रकृती पंचतत्व व कण कण मे
समाहित है जिसके सामर्थय से धरती पर
दिनरात संभव है जिसकी शक्ति से समस्त
ग्रह संचालित हैं .और सूर्य के घेरे लगाते हैं .
(10)प्रकृती शक्ति को मानने बालो
प्रकृती की सत्ता को मानो और
निष्ठापूर्वक प्रक्रति रक्षण नियमो का
पालन करो जो तुम्हे बचाएगा उस आग से
जिसे बडादेव ने अंत समय हेतु आसमान मे
और धरती के अंदर संजोय रखा हैं..जिसके
आखेट होंगे वे सब जो इस प्रक्रति और
धरती पर विगाड पैदा कर रहे हैं...इसलिए
जो सारे समुदाय मे और इस धरती पर
विगाड पैदा करते हैं दो सगा समुदायो
को लडवाते हैं वे शक्त सजा के हक़दार हैं
और इन्हे सजा देने बालो के सारे दोष
क्षमा हैं क्योंकि ऐसे लोगो को दंड देने मे
बडादेव कोई दया नहीं करता...और न ही
उन्हे रास्ता दिखाता हैं.... .

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