भारत देश की रीढ़ की हड्डी है मजदूर । फिर इस संकट की घड़ी में क्यों है मजबूर । सड़कों पर मजदूर पैदल चला जा रहा है। ट्रक और ट्रेनों द्वारा क्यों कुचला जा रहा है। भूखा प्यासा पैदल सड़कों पर चला जा रहा है। सरकार की नजरों में बस ट्रेनों से जा रहा है। सरकारी योजनाओं में मजदूर को लगी झड़ी है। लेकिन कहीं भूखा प्यासा तो कहीं लाश पड़ी है। मेरे देश के मजदूर की कौन सुनेगा पुकार। आखिर कब तक ऐसे ही करती रहेगी सरकार । मेरे देश के लिए मजदूर ही भगवान है। देश कर हर काम में मजदूर ही मेहरबान है। वाह रे आत्मनिर्भर भारत जिनको भारत पसंद नहीं था उनको हवाई जहाज घर लाये । और जो भारत के निर्माण में व्यस्त थे, वह कयी कोसों से पैदल चल कर आये।