मोतीकण .......................
पुज्यनिय आचार्य गोंडीयन धर्मगुरु मोतीरावणजी कंगाली सर की याद मे ..............
प्रिय नवयुवक गोंडीयन सगाजनों आप सभी को ति. अवचितराव सयाम का सप्रेम जय सेवा जय गोंडवाना .
आइए .
==================
फडापेन सुमिरन मंत्र को हिंदी में को समझने का प्रयास करते है .
==================
उन सभी हमारे अपने कोया धर्म मुठवाओं ने अनंत सृष्टी और चराचर जगत में पालन ओर संहार करने वाली अनादि शक्तियों की जानकारी ,सुयमोद सत्य के माध्यम से कोयापुत्रों को सत्य ज्ञान शिक्षा से प्रदान कि है .
ताकि भुताल के अण्डज, पिण्डज ,स्वदेज और उदभित के कल्याण साध्य संभव हो सके .
उन्ही मुठवाओं की शिक्षा से मानव प्राणी जीवन को सुखमय और शांतीमय बना सका है .
आदिम तैंतीस कोट मुठवाओं ने ,आदि गुरु पहांदी पारी कुपार लिंगो की आज्ञानुसार, पृथ्वी के तैंतीस मुल तत्वों को, सुयमोद अर्थात सत्य ज्ञान के माध्यम से जाना और कोयापुत्रों को उपदेश दिया.
की सृष्टी और चराचर जगत के सृजन और पालनहार एंव संहार तथा संरक्षण के पंच भुत प्रचण्ड शक्तियों की कृपा है .
जिनकी संपूर्ण सृष्टी ऋणी है .
हम इनकी वंदना करते है .
नतमस्तक होकर सेवा जौहार करते है .जल तर्पण करते है धुप देते है ,हल्दी चावल सेंदुर का तिलक करते है .
महुआ एंव सफेद फुल तथा तोया फल आपको अर्पीत कर जल तर्पण करते है .
समस्त देव शक्तियों को आहवान करते है .
फडापेन ता=====सेवा सेवा
बुढल पेन ता====सेवा सेवा
जंगोदाई ना ====सेवा सेवा
लिंगो बाबा ना ==सेवा सेवा
धरती दाई ता ==सेवा सेवा
जल देवता ना ==सेवा सेवा
आकाश देव ना =सेवा सेवा
अंग्निदेव ता ===सेवा सेवा
पवन देवता ====सेवा सेवा
परसा पेनता === सेवा सेवा
धर्म गुरु पारी कुपार लिंगों ता ============सेवा सेवा
कली कंकाली दाई ता==== ============सेवा सेवा
खैरादाई ता ====सेवा सेवा
वीरासन दाई ता = सेवा सेवा
राज राजेश्वरी माता ता ============सेवा सेवा
दंतेश्वरी माता ता =सेवा सेवा
भिमाल पेन ता ===सेवा सेवा
सगा पेन्कना ====सेवा सेवा
मातृशक्ती ता ====सेवा सेवा
बारंद वाली माताना======
============सेवा सेवा
हिंगलाजनी दाई ना ======
============सेवा सेवा
रतनपुर की माहामाया दाई ना =========सेवा सेवा
चांदागढ की कलीकंकाली ना ===========सेवा सेवा
कछारगढ के समस्त देवी देवताओं ना ===सेवा सेवा
लांजी की लंजकाई माता ना ===========सेवा सेवा
अमुरकोट के देवी देवताओं ना =========सेवा सेवा
नर्मदा दाई ना ==सेवा सेवा
पुरखाल्क ना ===सेवा सेवा
रानी दुर्गावती माता ना=== ===========सेवा सेवा
बग्घाराज बाबा ना===== ===========सेवा सेवा
घाट के समस्त देवी देवता ना
==========सेवा सेवा
वनस्पती दाई ना =सेवा सेवा
सुर्य देवता ना ===सेवा सेवा
चंद्र देवता ना ===सेवा सेवा
जंगो रायताड ना =सेवा सेवा
बावनगढ के समस्त देवी देवता ना ===== सेवा सेवा
सत्तावन परगणा के समस्त देवी देवताओं ना ==सेवा सेवा
सृष्टीके सभी चल -अचल, दृष्य- अदृष्य, सजीव- निर्जीव सभी शक्तियों की सेवा करोगे
इसी बडी उम्मीद के साथ पुज्यनिय आचार्य मोतीरावनजी कंगाली सर को भावपूर्ण आदरांजली आप सभी सगाजनों की ओरसे अर्पीत करते है .
पुज्यनिय आचार्य गोंडीयन धर्मगुरु मोतीरावणजी कंगाली सर की याद मे ..............
प्रिय नवयुवक गोंडीयन सगाजनों आप सभी को ति. अवचितराव सयाम का सप्रेम जय सेवा जय गोंडवाना .
आइए .
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फडापेन सुमिरन मंत्र को हिंदी में को समझने का प्रयास करते है .
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उन सभी हमारे अपने कोया धर्म मुठवाओं ने अनंत सृष्टी और चराचर जगत में पालन ओर संहार करने वाली अनादि शक्तियों की जानकारी ,सुयमोद सत्य के माध्यम से कोयापुत्रों को सत्य ज्ञान शिक्षा से प्रदान कि है .
ताकि भुताल के अण्डज, पिण्डज ,स्वदेज और उदभित के कल्याण साध्य संभव हो सके .
उन्ही मुठवाओं की शिक्षा से मानव प्राणी जीवन को सुखमय और शांतीमय बना सका है .
आदिम तैंतीस कोट मुठवाओं ने ,आदि गुरु पहांदी पारी कुपार लिंगो की आज्ञानुसार, पृथ्वी के तैंतीस मुल तत्वों को, सुयमोद अर्थात सत्य ज्ञान के माध्यम से जाना और कोयापुत्रों को उपदेश दिया.
की सृष्टी और चराचर जगत के सृजन और पालनहार एंव संहार तथा संरक्षण के पंच भुत प्रचण्ड शक्तियों की कृपा है .
जिनकी संपूर्ण सृष्टी ऋणी है .
हम इनकी वंदना करते है .
नतमस्तक होकर सेवा जौहार करते है .जल तर्पण करते है धुप देते है ,हल्दी चावल सेंदुर का तिलक करते है .
महुआ एंव सफेद फुल तथा तोया फल आपको अर्पीत कर जल तर्पण करते है .
समस्त देव शक्तियों को आहवान करते है .
फडापेन ता=====सेवा सेवा
बुढल पेन ता====सेवा सेवा
जंगोदाई ना ====सेवा सेवा
लिंगो बाबा ना ==सेवा सेवा
धरती दाई ता ==सेवा सेवा
जल देवता ना ==सेवा सेवा
आकाश देव ना =सेवा सेवा
अंग्निदेव ता ===सेवा सेवा
पवन देवता ====सेवा सेवा
परसा पेनता === सेवा सेवा
धर्म गुरु पारी कुपार लिंगों ता ============सेवा सेवा
कली कंकाली दाई ता==== ============सेवा सेवा
खैरादाई ता ====सेवा सेवा
वीरासन दाई ता = सेवा सेवा
राज राजेश्वरी माता ता ============सेवा सेवा
दंतेश्वरी माता ता =सेवा सेवा
भिमाल पेन ता ===सेवा सेवा
सगा पेन्कना ====सेवा सेवा
मातृशक्ती ता ====सेवा सेवा
बारंद वाली माताना======
============सेवा सेवा
हिंगलाजनी दाई ना ======
============सेवा सेवा
रतनपुर की माहामाया दाई ना =========सेवा सेवा
चांदागढ की कलीकंकाली ना ===========सेवा सेवा
कछारगढ के समस्त देवी देवताओं ना ===सेवा सेवा
लांजी की लंजकाई माता ना ===========सेवा सेवा
अमुरकोट के देवी देवताओं ना =========सेवा सेवा
नर्मदा दाई ना ==सेवा सेवा
पुरखाल्क ना ===सेवा सेवा
रानी दुर्गावती माता ना=== ===========सेवा सेवा
बग्घाराज बाबा ना===== ===========सेवा सेवा
घाट के समस्त देवी देवता ना
==========सेवा सेवा
वनस्पती दाई ना =सेवा सेवा
सुर्य देवता ना ===सेवा सेवा
चंद्र देवता ना ===सेवा सेवा
जंगो रायताड ना =सेवा सेवा
बावनगढ के समस्त देवी देवता ना ===== सेवा सेवा
सत्तावन परगणा के समस्त देवी देवताओं ना ==सेवा सेवा
सृष्टीके सभी चल -अचल, दृष्य- अदृष्य, सजीव- निर्जीव सभी शक्तियों की सेवा करोगे
इसी बडी उम्मीद के साथ पुज्यनिय आचार्य मोतीरावनजी कंगाली सर को भावपूर्ण आदरांजली आप सभी सगाजनों की ओरसे अर्पीत करते है .
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