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मजदूर क्यों है मजबूर

भारत देश की रीढ़ की हड्डी है मजदूर । फिर इस संकट की घड़ी में क्यों है मजबूर ।  सड़कों पर मजदूर पैदल चला जा रहा है।  ट्रक और ट्रेनों द्वारा क्यों कुचला जा रहा है। भूखा प्यासा पैदल सड़कों पर चला जा रहा है। सरकार की नजरों में बस ट्रेनों से जा रहा है। सरकारी योजनाओं में मजदूर को लगी झड़ी है। लेकिन कहीं भूखा प्यासा तो कहीं लाश पड़ी है। मेरे देश के मजदूर की कौन सुनेगा पुकार। आखिर कब तक ऐसे ही करती  रहेगी सरकार । मेरे देश के लिए मजदूर ही भगवान है। देश कर हर काम में मजदूर ही मेहरबान है। वाह रे आत्मनिर्भर भारत जिनको भारत पसंद नहीं था  उनको हवाई जहाज घर लाये । और जो भारत के निर्माण में व्यस्त थे,  वह कयी कोसों से पैदल चल कर आये।                     
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तरूण सागर जी महाराज के कहे कुछ पंक्तियों के अँश

तरूण सागर जी महाराज के कहे कुछ पंक्तियों के अँश : सफलता के 20  मँत्र " 👏 👏1.खुद की कमाई  से कम           खर्च हो ऐसी जिन्दगी           बनाओ..! 👏2. दिन  मेँ कम  से कम            3 लोगो की प्रशंसा करो..! 👏3. खुद की भुल स्वीकारने            मेँ कभी भी संकोच मत            करो..! 👏4. किसी  के सपनो पर  हँसो            मत..! 👏5. आपके पीछे खडे व्यक्ति            को भी कभी कभी आगे            जाने का मौका दो..! 👏6. रोज हो सके तो सुरज को            उगता हुए देखे..! 👏7. खुब जरुरी हो तभी कोई           चीज उधार लो..! 👏8. किसी के पास  से  कुछ            जानना हो तो विवेक  से            द...

तरूण सागर जी महाराज के कहे कुछ पंक्तियों के अँश

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सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग

लाखों लोगों के सपने निगल गया !!! ”सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग”! HINDI MOTIVATIONAL BLOG ************************* दोस्तों, फ़िल्म तमाशा देखकर वाकई समझ् में आया हर इंसान के दो रूप होते हैं एक उसका असली रूप जिसको वह अकेला जानता हैं और दूसरा रूप जो वह दुनिया को दिखाने के लिये जीता हैं । पहला रूप बचपन से उत्पन्न होता हैं मतलब पागलपन , किसी की भी परवाह नहीं , कुछ भी कर गुजरने की जिद , नया सीखने का साहस , अदभुत उमंग और जुनून । लेकिन जैसे जैसे बडा हुआ लोगों ने उस बचपन को कुचलना शुरू किया और धीरे- धीरे लोगों ने मेरे ऊपर अपनी सोच को थोपना शुरू किया । और कुछ समय बाद मेरे दूसरे रूप का उदय हुआ जो दूसरे लोगों या दुनिया की सोच के मुताविक हैं और मेरा पहला रूप बचपन वाला कही छुप गया । अब मुझे भी ज़माने ने अपनी दौड़ में शामिल कर लिया । जिसमें मुझे केवल Doctor या Engineer बनना था, अपने आप को भूलकर क्योंकि अब मुझे एक भयानक रोग लग चुका था। क्या कहेंगे लोग् ? हां एक भयानक रोग क्या कहेंगे लोग । मतलब अब मैं कुछ भी करने से पहले क्या कहेंगे लोग सोचने लगा और कई बार तो लोग क्या सोचेंगे...

गोंड जनजाति

गोंड (जनजाति),भारत की एक प्रमुख जनजाति 13 राज्य में फैली है गोंड (जनजाति) - 14 करोड़ (मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र,छत्तीसगढ़, तेलंगाना , आंध्र प्रदेश,उड़ीसा , कर्नाटक ,उत्तर प्रदेश ,बिहार , ,ज़ारखंड ,गुजरात, पक्षिम बंगाल , आसाम )..13 राज्य में फैला है गोंड जनजाति समुदाय . गोंड (जनजाति), भारत की एक प्रमुख जनजाति हैं। गोंड भारत के कटि प्रदेश - विंध्यपर्वत, सतपुड़ा पठार, छत्तीसगढ़ मैदान में दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम - में गोदावरी नदी तक फैले हुए पहाड़ों और जंगलों में रहनेवाली आस्ट्रोलायड नस्ल तथा द्रविड़ परिवार की एक जनजाति, जो संभवत: पाँचवीं-छठी शताब्दी में दक्षिण से गोदावरी के तट को पकड़कर मध्य भारत के पहाड़ों और जंगलों में फैल गई। आज भी मोदियाल गोंड जैसे समूह हैं जो जंगलों में प्राय: नंगे घूमते और अपनी जीविका के लिये शिकार तथा वन्य फल मूल पर निर्भर हैं। गोंडों की जातीय भाषा गोंडी है जो द्रविड़ परिवार की है और तेलुगु, कन्नड़, तमिल आदि से संबन्धित है। परिचय-बूड़ादेव, दुल्लादेव, घनश्यामदेव, बूड़ापेन (सूर्य) और भीवासू गोंडों के मुख्य देवता हैं। इनके अतिरिक्त फसल, शिकार, ...

अनमोल वचन

भगवान के आगे दीपक जलाने का फल तब ज्यादा होता है, जब हम किसी का दिल न जलाये। जय बड़ादेव

सूचना

जय सेवा जय बड़ादेव आप सभी सगाजनों को सूचित किया जाता है कि गोंडवाना महासभा युवा प्रकोष्ठ इकाई मध्यप्रदेश के तत्वावधान मे दिनांक 05 जून 2016 दिन रविवार को रायसेन मे बैठक रखी गयी है,जिसमे आप सभी युवा भाई बहन सादर आमंत्रित है। अभी स्थान तय नहीं किया जैसे ही स्थान तय हो जायेगा आपको सूचना कर दी जायेगी ।